“एहम जरूरते”

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दो वक्त की रोटी ,
एक गाङी, चाहे हो छोटी ,
काफी है मेरे लिए ।

गर्मीयों में कुल्फ़ी का ठण्डा स्वाद ,
मा बाप का बrस्ता आशीर्वाद ,
काफी है मेरे लिए ।

आछा आचरण और तंदरुस्त बदन ,
एक सुन्दर और प्यारा सा सदन ,
काफी है मेरे लिए ।

 

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